Friday, April 18, 2014

जड़ों से ठीक करें ग्रहों की चाल

रत्नों की प्रामाणिकता और शुद्धता को लेकर सन्देह हर समय बना रहता है,और प्रत्येक व्यक्ति के लिये शुद्ध रत्न खरीद पाना भी असम्भव होता है,क्योंकि रत्नों के मूल्य बहुत ज्यादा होते हैं. ज्योतिष का एक क्षेत्र एेसा भी है जहाँ प्रत्येक वर्ग व्यक्ति के लिये समाधान है,वह है वनस्पति और जड़ों को धारण कर के अपने ग्रहयोगों को सुधारना. यह बहुत सस्ता,प्रभावशाली और सहज उपाय है जिसमें ग्रहों के अनुसार जड़ों और वनस्पतियों को विभक्त किया गया है. Þशारदा तिलकÞ और अन्य कई मध्य युगीन ग्रंथों में इस उपाय का उल्लेख मिलता है. एक निश्चित प्रक्रिया के अनुसार यदि अपनी राशि,नक्षत्र और कुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुरूप जड़ों को धारण किया जाये तो विस्मयकारी तरीके से लाभ होता है आपकी कुंडली में जो ग्रह आपके लिये हितकारी और प्रगतिकारक हैं उनका किसी अच्छे ज्योतिष से निर्धारण करा कर उस के अनुरूप जड़ को शुद्ध कर के,उस ग्रह से सम्बंधित दिन मंत्रों का जाप कर के धारण करें और प्रतिदिन जाप करते रहें तो निश्चित लाभ होता है.
सूर्य
यदि आपकी कुंडली में सूर्य नीच का होकर तुला राशि में है और केंद्र में या लग्नस्थ है तो कृत्तिका नक्षत्र वाले दिन बेल का एक जड़ प्रात:काल तोडक़र,शिवालय में शिवजी को समर्पित करें और ऊँ भास्कराय ह्रीं मंत्र का जाप करने के पश्चात गुलाबी धागे से धारण करें. प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करते रहें. रोग,संतानहीनता जैसी अन्य कई समस्याओं का समाधान होगा.
चंद्र
यदि आप की कुंडली में चंद्र नीच का होकर वृश्चिक राशि में है,या राहु,केतु और शनि द्वारा प्रभावित है तो, रोहिणी नक्षत्र वाले दिन खिरनी की जड़, शुद्ध करके शिवजी को समर्पित करें और ऊँ श्रां श्रीं श्रौं स:चंद्रमसे नम: मंत्र का जाप कर के सफेद धागे में धारण करें. फेफड़े सम्बंधित रोग,एकाकीपन और भावनात्मक समस्याओं का समाधान होगा.
मंगल
आपकी कुंडली में मंगल नीच का होकर कर्क राशि में हो या आप मांगलिक हों तो मृगशिरा नक्षत्र वाले दिन अनंतमूल की जड़ शुद्धिकरण के पश्चात हनुमान जी की पूजा कर के ऊँ अं अंगारकाय नम: मंत्र का जाप कर के नारंगी धागे से धारण करें. क्रोध, अवसाद और वैवाहिक बाधा से मुक्ति मिलेगी
बुध
यदि आपकी कुंडली में बुध द्वादश,अष्टम भाव में या नीच का होकर मीन राशि में है, तो आप आश£ेषा नक्षत्र वाले दिन विधारा की जड़ गणेश भगवान को को समर्पित करने के पश्चात ऊँ बुं बुधाय नम: मंत्र का जाप कर के हरे रंग के धागे में धारण करें. इस से बुद्धि विकसित होगी तथ निर्णय लेने में हो रही त्रुटि का भी समाधान होगा.
गुरु
आपकी कुंडली में यदि गुरु रहु द्वरा युक्त है,राहु द्वारा ²ष्ट है या नीच का होकर मकर राशि में है,तो शुद्ध और ताजी हल्दी की गाँठ पीले धागे में, पुनवर्सु नक्षत्र वाले दिन कृष्ण भगवान या बृहस्पति देव जी की पूजा कर के ऊँ बृं बृहस्पतये नम: मंत्र का जप करके धारण करें. व्यवसाय,नौकरी,विवाह सम्बन्धी समस्या और लीवर सम्बन्धी रोगों में लाभ होगा.
शुक्र
यदि आपकी कुंडली में शुक्र अष्टम भाव में है या नीच का होकर कन्या राशि में है, तो आप सरपोंखा की जड़, भरणी नक्षत्र वाले दिन सफेद धागे से सायंकाल के समय लक्ष्मी जी का पूजन कर ऊँ शुं शुक्राय नम: मंत्र का जाप कर के धारण करें. संतानहीनता, कर्ज की अधिकता और धन के अभाव जैसी समस्या से मुक्ति मिलेगी.
शनि
आपकी कुंडली में यदि शनि सूर्य युक्त है,सप्तम भाव में है या नीच का होकर मेष राशि में है तो आप अनुराधा नक्षत्र वाले दिन बिच्छू या बिच्छौल की घांस को नीले धागे से काली जी की पूजा के पश्चात ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप कर के धारण करें. कार्यों में हो रहे विलम्ब,कानूनी अड़चन और रोगों से मुक्ति मिलेगी.
राहु
आपकी कुंडली में राहु लग्न,सप्तम या भाग्य स्थान मे है, तथा शुभ ग्रहों से युक्त है तो आप आद्र्रा नक्षत्र वाले दिन चन्दन की लकड़ी का टुकड़ा शिव जी का अभिषेक कर के भूरे धागे में ऊँ रां राहुए नम: मंत्र का जाप कर के धारण करें. रोग, चिड़चिड़ापन, क्रोध, बुरी आदतों तथा अस्थिरता से मुक्ति मिलेगी.
केतु
यदि आपकी कुंडली में केतु,चन्द्र या मंगल युक्त होकर लग्नस्थ है, तो आप अश्विनी नक्षत्र वाले दिन गणेश जी का पूजन करने के पश्चात शुद्ध की हुई असगन्ध या अश्वगन्धा की जड़, ऊँ कें केतवे नम: मंत्र का जाप करने के पश्चात, नारंगी धागे से धारण करें. चर्म सम्बन्धी रोग,किडनी रोगों और वैवाहिक समस्याओं में लाभ होगा.
याद रखें कि समस्या की पूर्ण मुक्ति के लिये, आपको मंत्रों का जाप प्रतिदिन करना होगा.
ग्रह और उनसे सम्बन्धित दान सामग्री
यदि आपको कोई ग्रह परेशान कर रहा है,तो सम्बन्धित जड़ को धारण करने के पश्चात उस से सम्बन्धित वस्तुओं का गरीब और असहाय लोगों को दान करने से भी लाभ होता है:
सूर्य : माणिक्य, लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चंदन, गुड़, केसर अथवा तांबा.
चंद्र : बांस की टोकरी, चावल, श्वेत वस्त्र, श्वेत पुष्प, घी से भरा पात्र, चांदी, मिश्री, दूध, दही.
मंगल : मूंगा, गेहूं, मसूर, लाल वस्त्र, कनेर पुष्प, गुड़, तांबा, लाल चंदन, केसर.
बुध : हरे मूंग, हरा वस्त्र, हरा फल, पन्ना, केसर, कस्तूरी, कपूर, घी, मिश्री, धार्मिक पुस्तकें.
गुरू : घी, शहद, हल्दी, पीत वस्त्र, शास्त्र पुस्तक, पुखराज, लवण, कन्याओं को भोजन.
शुक्र : सफेद वस्त्र, श्वेत स्फटिक, चावल, सुगंधित वस्तु, कपूर, अथवा पुष्प, घी- शक्कर- मिश्री-दही.
शनि : तिल, सभी तेल, लोहा धातु, छतरी, काली गाय, काला कपड़ा, नीलम, जूता,कंबल.
राहु : गेहूं, उड़द, काला घोड़ा, खडग़, कंबल, तिल, लौह, सप्त धान्य, अभ्रक.
केतु : तिल, कंबल, काला वस्त्र तथा पुष्प, सभी तेल, उड़द, काली मिर्च, सप्तधान्य.

Saturday, April 5, 2014

MLC

When can a copy of the MLC report be issued to the accused?
QUESTION—Please answer the following question. I have asked three different legal experts and they have given three different answers:

An ACCUSED  wants attested copy of medicolegal report from the doctor. The doctor will issue the report:-
A. On Court Order only.
B. On order of the hospital higher authority only ( Medical Suptt./ HOD)
C. Under the RTI Act.
D. Can issue the report directly on application and deposit of fee.
E. Any of the above
F. Any other procedure under Law.


ANSWER—

1—As per rules, the medico-legal report is prepared by the doctor for the police at the specific or deemed request of the police. To quote Modi, “Medico-legal reports are the documents prepared by medical officers in obedience to a demand by an authorised police officer or a magistrate”. The original is to be given to the police and the copy is to be retained by the hospital. It is clear that the transaction is between the police and the hospital / doctor. All other parties are strangers to this transaction. The MLC report is an important document for investigation of crime and cannot be revealed to others without the permission of the authorities concerned, which are the state / police and the court.

2—As a matter of fact, if the applicant accused wants a copy of the MLC, it stands to common sense that the copy should be made from the original and not from a copy of the original. It is again logical that that the holder of the original should provide the copy. The practice of the hospital telling the accused to bring an NOC from the police before issuing a copy to the applicant is questionable. Since the original is supposed to be in the possession of the police, the police themselves should give a copy of the original to the applicant.

3—None of the responses A to E is really correct. The logically correct answer is that  
 “If an accused wants attested copy of the medicolegal report, he should apply for such a copy to the holder of the original. The original is supposed to be with the police. However, if the original is with the hospital / doctor, a copy can be supplied as per  court orders or on production of  a No Objection Certificate from the police”.

M C Gupta
4 September 2011

1—It is not correct that an MLC report is a personal document. It is an official document. There need not be a  privity of contract between the person examined by a doctor during the court of preparing an MLC report and treated for any injury found. The person may be a a total stranger whom the doctor may never have seen earlier. The doctor may not even like to have him as a patient due to a variety of reasons within law. The person may have been brought to the doctor by the police for preparing an MLC as a requirement under law. Thus it is clear that an MLC report is not a personal document. It is an official document prepared at prior or deemed prior request made by the police to the doctor. That is why the original is to be given to the police and the copy is kept by the hospital / doctor. If it were a personal document, the original would have been given to the person upon whom the MLC was done. The MLC report is an official document between two offices—the hospital and the police.
 
2—For the reasons stated above, a copy of the MLC report cannot be and should not be and is not handed over to the person upon whom  the medico-legal examination has been done.
 
3—The question of the hospital giving a copy of the RTI to anybody asking for it under the  RTI Act does not arise because of the following reasons:
 
a—It is simple logic that a copy can and should be given only by the person who has the right over the original. The right to possess the original lies with the police.
 
b—However, the exception to the above would be in a situation where the court orders the hospital to provide a copy to anybody.
 
c—The MLC report is a crucial document affecting that contains information pertaining to a person’s health and the information gained by a doctor during medical examination is personal information gained by a doctor as professional privilege and such professional privilege cannot be breached by making the information public.
 
d—Even if the hospital is covered under the RTI Act, the application for information regarding a patient made by a third party cannot be revealed without the permission of the person concerned, as laid down in the RTI Act itself..
 

M C Gupta